Monday, 30 May 2011

I don't care : Latest Mb. talk



प्रिय मित्रों,
उत्तर महाभारत महाग्रंथ में कलयुग के भविष्य के बारे में महर्षि वेदव्यास
ने कुछ त्रुटिरहित कथन किए हैं
शिक्षा जगत में व्याप्त मलिनता के कारण, ज्ञान और विद्या का नाश होगा
(
सही - ग़लत )
(
पढ़ने-पढ़ाने वालों की पढ़ाई के क्षेत्र में उदासीनता और सच्चे ज्ञान
का ह्रास ?)
आईए, सुनें, एक आधुनिक कॉलेज कन्या की मोबाईल talk..!!

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अरे यार..!! माय मम्मा भी देखना? सुबह-सुबह कॉलेज जाते वक़्त ही उसकी
खिचपिच शुरु हो गई..!! शैला ये ड्रेस मत पहनना, इसमें तेरा सारा बदन
दिखता है आज जल्दी वापस घर जाना यार हमारी कोई चोईस ही नहीं? शैलाब
की भी रिंग आई थी ,"हाय हनी, कॉलेज रही है ना? आज कहाँ मिलना है? मैं,
शैला उसे पोपट से मिलूँ? MY FOOT!! साला कभी पॉकेट में  तो हाथ डालता
नहीं है ? LEAVE IT यार..!!"



इस मंथ के मेरे सारे पॉकेट मनी फिनिश हो गए हैं, बट यु नॉ? मैने क्या
किया? इस शैला ने  स्मार्टनेस दिखाते हुए, उस पोंगा पंडित कौशिक को ऐसी
मीठी स्माईल देदी कि, उसने ५०० का नोट तुरंत निकाल कर मुझे दे दिया
नहीं यार, फ्री में नहीं..!! उसके बदले, मैंने उसके साथ लोंग ड्राइव पर
जानेका प्रोमिस किया है

तु भी आएगी क्या? वो रितुडी को हमारे साथ आना था मगर, you know !! वो
सिर्फ न्यूज़ पेपर नहीं, पूरा न्यूज़ चैनल है? क्या, ऍक्ज़ाम नज़दीक है?
तु कब से ऍक्ज़ाम की फ़िक्र करने लगी? ही..ही..ही..!!



मुझे  कोई चिंता नहीं है? you see, मैंने तो वो हॅन्डसम प्रोफेसर हैं ना?
हाँ..हाँ, उसी को पटा लिया है..!! मुझे बहुत हॅल्प कर रहा है
नहीं,नहीं..वो मेरा नहीं, शैलाब का  रिलेटिव है उसका हैबिट थोड़ा ख़राब
है, मेरे साथ शॅक हॅन्ड करने के बाद हाथ जल्दी छोड़ता नहीं है..!!
नहीं..नही..यार,उसकी? नो मोर हिंमत, शैला को तो तु जानती है ना? मुझे
ऐसों को हैन्डल करना अच्छी तरह आता है..!!



सन्डे को क्या करती? या....!! मेरा ये सन्डे बिलकुल बेकार गुज़रा मेरी
मम्मा अभी से, you know,जन्म कुंडली और ऐसा ही कुछ समथिंग-समथिंग ले कर,
मेरे रिश्ते के लिए रिश्तेदारों से बात करती रहती है? बट, मैंने तो उसको
क्लिन-क्लिन कह दिया है, हालाँकि मैं थर्ड ईयर में स्टडी कर रही हूँ,But,
I want to study further?



मेरे पापा? मेरे पापा तो वॅरी-वॅरी nice guy है..!! पता है, एक दिन क्या
हुआ था? उन्होंने मुझे हैं ना, शैलाब के साथ बाईक पर चिपक कर बैठे हुए
देख लिया था, फिर भी ही डीडन्ट टेल मी सिंगल वर्ड..या..?



मेरी मम्मा, मेरी शादी को लेकर, फ़ालतू में Worry हो रही है..!! हाँ..मगर
पापाने, मम्मा को  टू मच, worry करते देखकर, उसे साफ-साफ कह दिया, शिला
is mature  enough  to take care of her self..!!
No..no..
यार,  कॉलेज के किसी भी पोपट के साथ,मेरेज तो मैं करनेवाली
नहीं..!!
पापा जहाँ कहेंगे, उसी लड़के के साथ..!! you know our संस्कार culture और
ऐसा ही कुछ समथिंग-समथिंग,

O.K. I am in hurry,we will talk  later,bye."

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जान ले लो  मेरी मगर प्यार से(गीत)

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नोट- पूरे गीत में, प्रितम शैलाब गीत गा कर शिला से प्यार जता रहा है और
शैला `I DON`T CARE.` कह कर इन्कार कर रही है

जान ले लो  मेरी, मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

ज़ख्म दे  दो नया, मगर प्यार से...!!
I DON`T CARE.
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चल पड़ा हूँ मैं, इश्क़ की राह पर

दिल रखा है क़दमों में, हर आह पर

दो क़दम साथ चल, मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

.

ज़ुल्फ़ में तेरी यूं ही उलझता गया

अश्क बहते रहे, मैं पिघलता रहा

एक नज़र देख ले,मगर प्यार से....!!

I DON`T CARE.

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आग सी लग गई, जिस्म जलता रहा

साँस  थम  सी   गई, मैं  तड़पता रहा

दिल जलाओ मेरा, मगर प्यार से.....!!
I DON`T CARE.
 
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कोई  क्यूँ मरे, बेरूख़ी देख कर

कोई कैसे जीए, यार को छोड़ कर

क़त्ल कर दो मेरा,मगर प्यार से....!!
I DON`T CARE.
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बस, हम आगे और क्या कहें, साहब..!! अब, आप ही कुछ फरमाईए !

by- hindustan ki awaz

Friday, 27 May 2011

Hindustan ki awaaz...





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RAHUL DEV

Monday, 2 May 2011

The Great Indian Railways...

भारतीय रेल की कहानी (The Great Indian Railways)
भारत में स्‍थल यातायात का प्रमुख साधन रेल गाड़ी ही है। रेलें भारतीय जन मानस में रची बसीं हुईं हैं। कई लोक गीतों में रेलों, रेल यात्राओं आदि का वर्णन किया जाता हैं। फिल्‍मों में, दूरदर्शन धारावाहिकों में, उपन्‍यासों और कहानियों में रेलें एक महत्‍वपूर्ण विषय हैं। भारतीय रेलों का विश्व में दूसरा व एशिया में पहला स्‍थान है। भारत में सर्वप्रथम रेल 1853 में मुम्‍बई से थाणे के मध्‍य चली। यह रेलवे मार्ग 34 किलोमीटर लम्‍बा था, लेकिन विश्व में पहली रेल 1830 में लिवर पूल से मानचैस्‍टर तक चली। उस समय लोगों के दिलो-दिमाग में रेलों की संचालन व्‍यवस्‍था को लेकर कई शक थे, मगर धीरे-धीरे रेलें सम्‍पूर्ण यातायात व्‍यवस्‍था में सबसे महत्‍वपूर्ण हो गयीं। भारत में प्रथम रेल लाइन का निमार्ण 1948-49 में हावडा-रानीगंज (पश्चिम-बंगाल)में शुरू हुआ। इस समय भारत में कुल 9 रेलवे क्षेत्र हैं। रेलवे बोर्ड सम्‍पूर्ण व्‍यवस्‍था को देखता है। इसमें 6 सदस्‍य होते हैं। संसद में 1924-25 से ही रेलवे बजट अलग से प्रस्‍तुत किया जाने लगा। 1929 में प्रथम विद्युत रेल मुम्‍बई से पूणे तक चली। देष भर में आजकल एक ही प्रकार की रेल लाईन (प्रोजेक्‍ट यूनीगेज) पर बड़ी तेजी से काम हो रहा है। 1950 में भारत में पहला भाप का इंजन, 1961 में पहला विद्युत इंजन बना था। बड़ी रेलों में शताब्‍दी एक्‍सप्रेस, पैलेस आन व्‍हील्‍स,तथा डबलडेकर ट्रेनें हैं।
रेलों को उनकी गति के आधार पर पैसेंजर, एक्‍सप्रेस, सुपर फास्‍ट, जनता एक्‍सप्रेस आदि में बांटा गया है। दोनों तरफ इंजन हो तो डबलहेडेड हो जाती हैं। केवल माल ले जाने वाली गुड्‌स ट्रेनें कहलाती है। भारत में भूमिगत रेलवे लाइन केवल कलकत्ता में है। अब दिल्‍ली में मेट्रो रेल सेवा शुरू हुई है। 1988 से देष में रेलों में आरक्षण में कम्‍प्‍यूटर लगें। हमारे देश में सबसे बड़ी सुरंग मंकीलह से खंडाला तक (2100 मीटर) है। सबसे बडा रेलवे पुल सोनपुर (बिहार) में हैं। सबसे बड़ा प्‍लेटफार्म खड़कपुर में है।
हमारे यहां लगभग 10,000 रेलवे इंजन है। देष भर में 45 वर्कशाप हैं। 7084 रेलवे स्टेशन हैं। 11 हजार ट्रेनें हैं। 11,300 पुल हैं। और 350 टन माल प्रतिदिन ढुलता है। रेलवे का एक बड़ा म्‍यूजियम दिल्‍ली में हैं। उदयपुर में भी एक रेलवे ट्रेनिंग स्‍कूल है। विकास के साथ साथ रेलों का प्रबन्‍ध बहुत कुशलता से किया जाता हैं। विकास के साथ साथ रेलों की गति में बहुत वृद्धि हुई है। इलेक्‍ट्रोनिक उपकरणों से सुसज्‍जित व्‍यवस्‍था से रेलों की यात्रा बहुत सुखद व आसान हो गयी हैं। रेलवे विभाग सुरक्षा की ओर पूरा ध्‍यान देता है। रेलवे समय का पाबन्‍द रहने में भी अग्रणी है। रेलवे में सुरक्षा, संरक्षा व समय की पाबन्‍दी पर विशेष ध्‍यान दिया जाता है।
भारतीय रेलों से यात्रा करना आज भी रोमांचक है। और शायद आगे भी रहेगा। आज भी तीर्थ यात्री, सुकून से यात्रा करने वाले पर्यटक, मनमौजी यात्री रेलों से ही यात्रा करना पसंद करते है। भारतीय रेलें सही मायने में एक समाजवादी गाड़ी हैं, तृतीय श्रेणी समाप्‍त कर दी गयी है। और प्रथम श्रेणी व वातानुकूलित डिब्‍बे कम हो रहे हैं। अतः सभी यात्री समान हैं और समान अधिकारों के साथ रेलवे में यात्रा करते हैं। रेलों के विकास में अंग्रेजों ने भी योगदान दिया। आजादी के बाद केन्‍द्र सरकार ने रेलों को तेजी से विकसित किया। यह भारत का सबसे बडा विभाग है, जिसमें लाखों लोग काम करते हैं। बर्मा व पाकिस्‍तान के अलग होने से क्रमशः 3200 कि0 मी0 लाईन भारत से अलग हो गयी है। रेलों के पुराने इंजन, कार्य प्रणाली, डिब्‍बे, सिगनल व तार सुविधा आदि को समझने, देखने के लिए रेलवे म्‍यूजियम दिल्‍ली का अवलोकन किया जा सकता है। रेलें भारत की संस्‍कृति, एकता, अखण्‍डता और समरसता का प्रतीक हैं। रेलें हमारी अर्थ व्‍यवस्‍था व सामाजिक जीवन से बहुत गहरे तक जुड़ी हुई है। रेलों के सरोकार भारतीय जन जीवन के सरोकार हैं। रेलों के बिना भारतीय जन जीवन की कल्‍पना नहीं की जा सकती है।
'''''''''By- Yasvant Kothari and with thanks to Rachanakar

गाँधी होने का अर्थ

गांधी जयंती पर विशेष आज जब सांप्रदायिकता अनेक रूपों में अपना वीभत्स प्रदर्शन कर रही है , आतंकवाद पूरी दुनिया में निरर्थक हत्याएं कर रहा है...