औरों को हँसते देखो मनु हँसो और सुख पाओ, अपने सुख को विस्तृत कर लो, सबको सुखी बनाओ ! - कामायनी

Labels

Monday, 28 March 2016

प्रेमनंदन की पांच कविताएँ



1- अफवाहें बनती बातें

सच यही है
कि बातें वहीं से शुरू हुईं
जहाँ से होनी चाहिए थीं
लेकिन खत्म हुईं वहाँ
जहाँ नहीं होनी चाहिए थीं

बातों के शुरू और खत्म होने के बीच
तमाम नदियाँ, पहाड़, जंगल और रेगिस्तान आए
और अपनी उॅचाइयाँ, गहराइयाँ, हरापन और
नंगापन थोपते गए

इन सबका संतुलन साध पाने वाली बातें
ठीक तरह से शुरू होते हुए भी
सही जगह नहीं पहुँच पाती-
अफवाहें बन जाती हैं

ऐसे विकराल समय में
बातों का अफवाहें बनना ठीक नहीं !


2- दूषित होती ताजी साँसे

अभी-अभी किशोर हुईं
मेरे गाँव की ताजी साँसे
हो रही हैं दूषित
सूरत, मुम्बई, लुधियाना में...

लौट रहीं हैं वे
लथपथ,
दूषित, दुर्गन्धित

उनके संपर्क से
दूषित हो रही हैं
साफ, ताजी हवायें
मेरे गाँव की !


3- आग, पानी और प्यास

जब भी लगती है उन्हें प्यास
वे लिखते हैं
खुरदुरे कागज के चिकने चेहरे पर
कुछ बूँद पानी
और धधकने लगती है आग !

इसी आग की आँच से
बुझा लेते हैं वे
अपनी हर तरह की प्यास!

आग और पानी को
कागज में बाँधकर
जेब में रखना
सीखे कोई उनसे !


4- यही तो चाहते हैं वे

लड़ना था हमें
भय, भूख, और भृष्टाचार के खिलाफ !

हम हो रहे थे एकजुट
आम आदमी के पक्ष में
पर उन लोगों को
नहीं था मंजूर यह !

उन्होंने फेंके
कुछ ऐंठे हुए शब्द
हमारे आसपास
और लड़ने लगे हम
आपस मे ही !

वे मुस्कुरा रहें हैं दूर खड़े होकर
और हम लड़ रहें हैं लगातार
एक दूसरे से
बिना यह समझे
कि यही तो चाहते हैं वे !


5 - खामोश आँखों की भाषा

हरामखोरी की चमक से
लाखों गुना अच्छा है
मेहनत का खुरदुरापन !

सैकड़ों सौन्दर्य प्रसाधनों से लिपे-पुते
दुनिया के सबसे हसीन चेहरे से
लाखों गुना अच्छा है
धूल, मिट्टी और पसीने से सना
मजदूर का चेहरा !

दुनिया भर की लफ्फाजी करती
दंभ भरी,
बजबजाती आवाजों से
बहुत अच्छी है
अपने मेहनताने की आस में 
टुकुर-टुकुर झरती
खामोश आँखों की भाषा !

 _________

प्रेम नंदन
जन्म - 25 दिसम्बर 1980, फरीदपुर, हुसेनगंज, फतेहपुर (0प्र0) |
शिक्षा - एम00(हिन्दी), बी0एड0 पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।
लेखन - कविता, लघुकथा, कहानी।
परिचय - लेखन और आजीविका की शुरुआत पत्रकारिता से। लगभग दो वर्षों तक पत्रकारिता करने तथा तीन-चार वर्षों तक भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टरी  के पश्चात सम्प्रति सिर्फ मास्टरी |
प्रकाशन- 1- यही तो चाहते हैं वे (शीघ्र प्रकाश्य), 2- कवितायें, कहानियां एवं  लघुकथायें पत्र-पत्रिकाओं एवं ब्लॉगों में प्रकाशित।
संपर्कउत्तरी शकुन नगर, सिविल लाइन्स, फतेहपुर, (उ०प्र०)|
मोबइल – 09336453835
ईमेल - premnandan10@gmail.com
ब्लॉग – aakharbaadi.blogspot.in

1 comments:

  1. संजिदगी से लिखी बेहतरीन कविताएं।

    ReplyDelete