औरों को हँसते देखो मनु हँसो और सुख पाओ, अपने सुख को विस्तृत कर लो, सबको सुखी बनाओ ! - कामायनी

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Friday, 31 January 2014

कविता चित्र

शब्द- वेणुगोपाल
चित्र- पंकज दीक्षित




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