औरों को हँसते देखो मनु हँसो और सुख पाओ, अपने सुख को विस्तृत कर लो, सबको सुखी बनाओ ! - कामायनी

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Wednesday, 19 February 2014

संवेदन



‘संवेदन’ के स्थायी स्तम्भ ‘समकालीन कविता परिदृश्य’, ‘समकालीन कहानी परिदृश्य’, 'कविता चित्र/रेखांकन' तथा ‘विधा-विविधा’ के लिए लेखक/कवि अपनी स्तरीय रचनाएँ ईमेल पता sahitya_sadan@rediffmail.com पर भेज सकते हैं, साथ में अपना छायाचित्र व संक्षिप्त परिचय भी अवश्य दें | आगे ‘संवेदन’ नाम से एक वार्षिक पत्रिका लाने का विचार है जिसमें इन स्तंभों के अंतर्गत प्रकाशित रचनाएँ प्रकाशित की जाएँगी...

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