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Monday, 2 May 2011

The Great Indian Railways...

भारतीय रेल की कहानी (The Great Indian Railways)
भारत में स्‍थल यातायात का प्रमुख साधन रेल गाड़ी ही है। रेलें भारतीय जन मानस में रची बसीं हुईं हैं। कई लोक गीतों में रेलों, रेल यात्राओं आदि का वर्णन किया जाता हैं। फिल्‍मों में, दूरदर्शन धारावाहिकों में, उपन्‍यासों और कहानियों में रेलें एक महत्‍वपूर्ण विषय हैं। भारतीय रेलों का विश्व में दूसरा व एशिया में पहला स्‍थान है। भारत में सर्वप्रथम रेल 1853 में मुम्‍बई से थाणे के मध्‍य चली। यह रेलवे मार्ग 34 किलोमीटर लम्‍बा था, लेकिन विश्व में पहली रेल 1830 में लिवर पूल से मानचैस्‍टर तक चली। उस समय लोगों के दिलो-दिमाग में रेलों की संचालन व्‍यवस्‍था को लेकर कई शक थे, मगर धीरे-धीरे रेलें सम्‍पूर्ण यातायात व्‍यवस्‍था में सबसे महत्‍वपूर्ण हो गयीं। भारत में प्रथम रेल लाइन का निमार्ण 1948-49 में हावडा-रानीगंज (पश्चिम-बंगाल)में शुरू हुआ। इस समय भारत में कुल 9 रेलवे क्षेत्र हैं। रेलवे बोर्ड सम्‍पूर्ण व्‍यवस्‍था को देखता है। इसमें 6 सदस्‍य होते हैं। संसद में 1924-25 से ही रेलवे बजट अलग से प्रस्‍तुत किया जाने लगा। 1929 में प्रथम विद्युत रेल मुम्‍बई से पूणे तक चली। देष भर में आजकल एक ही प्रकार की रेल लाईन (प्रोजेक्‍ट यूनीगेज) पर बड़ी तेजी से काम हो रहा है। 1950 में भारत में पहला भाप का इंजन, 1961 में पहला विद्युत इंजन बना था। बड़ी रेलों में शताब्‍दी एक्‍सप्रेस, पैलेस आन व्‍हील्‍स,तथा डबलडेकर ट्रेनें हैं।
रेलों को उनकी गति के आधार पर पैसेंजर, एक्‍सप्रेस, सुपर फास्‍ट, जनता एक्‍सप्रेस आदि में बांटा गया है। दोनों तरफ इंजन हो तो डबलहेडेड हो जाती हैं। केवल माल ले जाने वाली गुड्‌स ट्रेनें कहलाती है। भारत में भूमिगत रेलवे लाइन केवल कलकत्ता में है। अब दिल्‍ली में मेट्रो रेल सेवा शुरू हुई है। 1988 से देष में रेलों में आरक्षण में कम्‍प्‍यूटर लगें। हमारे देश में सबसे बड़ी सुरंग मंकीलह से खंडाला तक (2100 मीटर) है। सबसे बडा रेलवे पुल सोनपुर (बिहार) में हैं। सबसे बड़ा प्‍लेटफार्म खड़कपुर में है।
हमारे यहां लगभग 10,000 रेलवे इंजन है। देष भर में 45 वर्कशाप हैं। 7084 रेलवे स्टेशन हैं। 11 हजार ट्रेनें हैं। 11,300 पुल हैं। और 350 टन माल प्रतिदिन ढुलता है। रेलवे का एक बड़ा म्‍यूजियम दिल्‍ली में हैं। उदयपुर में भी एक रेलवे ट्रेनिंग स्‍कूल है। विकास के साथ साथ रेलों का प्रबन्‍ध बहुत कुशलता से किया जाता हैं। विकास के साथ साथ रेलों की गति में बहुत वृद्धि हुई है। इलेक्‍ट्रोनिक उपकरणों से सुसज्‍जित व्‍यवस्‍था से रेलों की यात्रा बहुत सुखद व आसान हो गयी हैं। रेलवे विभाग सुरक्षा की ओर पूरा ध्‍यान देता है। रेलवे समय का पाबन्‍द रहने में भी अग्रणी है। रेलवे में सुरक्षा, संरक्षा व समय की पाबन्‍दी पर विशेष ध्‍यान दिया जाता है।
भारतीय रेलों से यात्रा करना आज भी रोमांचक है। और शायद आगे भी रहेगा। आज भी तीर्थ यात्री, सुकून से यात्रा करने वाले पर्यटक, मनमौजी यात्री रेलों से ही यात्रा करना पसंद करते है। भारतीय रेलें सही मायने में एक समाजवादी गाड़ी हैं, तृतीय श्रेणी समाप्‍त कर दी गयी है। और प्रथम श्रेणी व वातानुकूलित डिब्‍बे कम हो रहे हैं। अतः सभी यात्री समान हैं और समान अधिकारों के साथ रेलवे में यात्रा करते हैं। रेलों के विकास में अंग्रेजों ने भी योगदान दिया। आजादी के बाद केन्‍द्र सरकार ने रेलों को तेजी से विकसित किया। यह भारत का सबसे बडा विभाग है, जिसमें लाखों लोग काम करते हैं। बर्मा व पाकिस्‍तान के अलग होने से क्रमशः 3200 कि0 मी0 लाईन भारत से अलग हो गयी है। रेलों के पुराने इंजन, कार्य प्रणाली, डिब्‍बे, सिगनल व तार सुविधा आदि को समझने, देखने के लिए रेलवे म्‍यूजियम दिल्‍ली का अवलोकन किया जा सकता है। रेलें भारत की संस्‍कृति, एकता, अखण्‍डता और समरसता का प्रतीक हैं। रेलें हमारी अर्थ व्‍यवस्‍था व सामाजिक जीवन से बहुत गहरे तक जुड़ी हुई है। रेलों के सरोकार भारतीय जन जीवन के सरोकार हैं। रेलों के बिना भारतीय जन जीवन की कल्‍पना नहीं की जा सकती है।
'''''''''By- Yasvant Kothari and with thanks to Rachanakar

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